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mahabharat 8.90.9: इस प्रकार रणभूमि में लड़ते हुए उन दोनों वीरों में वीरता, शस्त्रसंचालन, पराक्रम और पुरुषार्थ की दृष्टि से कभी सूतपुत्र कर्ण श्रेष्ठ होता था और कभी किरीटधारी अर्जुन श्रेष्ठ होता था॥9॥   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.90.9 
तयोरेवं युद्धॺतोराजिमध्ये
सूतात्मजोऽभूदधिक: कदाचित्।
पार्थ: कदाचित् त्वधिक: किरीटी
वीर्यास्त्रमायाबलपौरुषेण॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रणभूमि में लड़ते हुए उन दोनों वीरों में वीरता, शस्त्रसंचालन, पराक्रम और पुरुषार्थ की दृष्टि से कभी सूतपुत्र कर्ण श्रेष्ठ होता था और कभी किरीटधारी अर्जुन श्रेष्ठ होता था॥9॥
 
In this way, while fighting in the battlefield, among those two heroes, in terms of bravery, weapon handling, might and effort, sometimes Suta's son Karna was superior and sometimes the crowned Arjun was superior. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)