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mahabharat 8.90.87: ऐसा कहते हुए जब अर्जुन के बाणों के प्रहार से कर्ण व्याकुल हो गया, उसके घोड़े और सारथि लड़खड़ाकर गिरने लगे, तथा उसके प्राणों में चोट लगने के कारण वह अपने कर्तव्य पालन में दुर्बल हो गया, तब उसने बार-बार धर्म की निन्दा करनी आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  8.90.87 
एवं ब्रुवन् प्रस्खलिताश्वसूतो
विचाल्यमानोऽर्जुनबाणपातै:।
मर्माभिघाताच्छिथिल: क्रियासु
पुन: पुनर्धर्ममसौ जगर्ह॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहते हुए जब अर्जुन के बाणों के प्रहार से कर्ण व्याकुल हो गया, उसके घोड़े और सारथि लड़खड़ाकर गिरने लगे, तथा उसके प्राणों में चोट लगने के कारण वह अपने कर्तव्य पालन में दुर्बल हो गया, तब उसने बार-बार धर्म की निन्दा करनी आरम्भ कर दी।
 
While saying this, when Karna became disturbed by the attack of Arjun's arrows, his horse and charioteer began to stumble and fall, and he became weak in performing his duties due to the injury on his vital organs, then he started criticising Dharma repeatedly. 87
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)