श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  8.90.82 
ततस्तदस्त्रं मनस: प्रणष्टं
यद् भार्गवोऽस्मै प्रददौ महात्मा।
चक्रं च वामं ग्रसते भूमिरस्य
प्राप्ते तस्मिन् वधकाले नृवीर॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! अब कर्ण के वध का समय आ गया था। महात्मा परशुराम ने कर्ण को जो भार्गवस्त्र दिया था, वह उस समय उसके मन से निकल गया था - उसे उसकी याद नहीं रही। उसी समय पृथ्वी उसके रथ के बाएँ पहिये को निगलने लगी। 82.
 
O brave man! Now the time had come to kill Karna. The Bhaargavastra that Mahatma Parshuram had given Karna went out of his mind at that time – he could not remember it. At the same time, the earth started swallowing the left wheel of his chariot. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)