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mahabharat 8.90.80: तत्पश्चात् उस महासमर में परम बुद्धिमान् और किरीटधारी अर्जुन ने लोहे का बना हुआ, भयंकर शब्दों से युक्त, सर्प के विष और अग्नि के समान तेजस्वी, महारौद्रास्त्र से युक्त एक विशाल बाण कर्ण पर छोड़ने का विचार किया॥80॥   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  8.90.80 
तत: किरीटी भृशमुग्रनि:स्वनं
महाशरं सर्पविषानलोपमम्।
अयस्मयं रौद्रमहास्त्रसम्भृतं
महाहवे क्षेप्तुमना महामति:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस महासमर में परम बुद्धिमान् और किरीटधारी अर्जुन ने लोहे का बना हुआ, भयंकर शब्दों से युक्त, सर्प के विष और अग्नि के समान तेजस्वी, महारौद्रास्त्र से युक्त एक विशाल बाण कर्ण पर छोड़ने का विचार किया॥80॥
 
Then, in that great battle, Arjuna, the most wise and crowned one, thought of releasing a huge arrow at Karna, made of iron, full of terrible words, as brilliant as snake poison and fire, and charged with the Maharaudrastra. 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)