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mahabharat 8.90.79: इसके बाद कर्ण ने साहस जुटाया और क्रोधित सर्पों की तरह बाण चलाने लगा। उसने अर्जुन को दस बाणों से और कृष्ण को क्रोधित नागों की तरह छः बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  8.90.79 
तत: स कर्ण: समवाप्य धैर्यं
बाणान् विमुञ्चन् कुपिताहिकल्पान्।
विव्याध पार्थं दशभि: पृषत्कै:
कृष्णं च षड्‍‍भि: कुपिताहिकल्पै:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद कर्ण ने साहस जुटाया और क्रोधित सर्पों की तरह बाण चलाने लगा। उसने अर्जुन को दस बाणों से और कृष्ण को क्रोधित नागों की तरह छः बाणों से घायल कर दिया।
 
Thereafter Karna gathered courage and started shooting arrows like enraged serpents. He wounded Arjun with ten arrows and Krishna with six arrows like enraged cobras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)