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mahabharat 8.90.77: तत्पश्चात् कर्ण ने (सावधान होकर) शत्रुओं पर अनेक बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। जैसे पश्चिम की ओर जाते हुए सूर्य और उसकी किरणें लाल हो जाती हैं, उसी प्रकार रक्त से लाल हुआ वह बाणों की किरणों से सुशोभित हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  8.90.77 
स बाणसङ्घान् बहुधा व्यवासृजद्
विभाति कर्ण: शरजालरश्मिवान्।
सलोहितो रक्तगभस्तिमण्डलो
दिवाकरोऽस्ताभिमुखो यथा तथा॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कर्ण ने (सावधान होकर) शत्रुओं पर अनेक बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। जैसे पश्चिम की ओर जाते हुए सूर्य और उसकी किरणें लाल हो जाती हैं, उसी प्रकार रक्त से लाल हुआ वह बाणों की किरणों से सुशोभित हो रहा था।
 
Thereafter Karna (being cautious) started showering many arrows on his enemies. Just as the sun and its rays turn red while going towards the west, in the same way he, who had become red with blood, was being decorated with the rays of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)