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mahabharat 8.90.75: 75. चौड़ी और मोटी छाती वाले अधिरथपुत्र कर्ण का शरीर वत्सदंत नामक बाणों से बिंध जाने पर पुष्पित अशोक, पलाश, रेशमी वृक्ष और चंदन के वनों से युक्त पर्वत के समान सुशोभित हो गया।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  8.90.75 
स वत्सदन्तै: पृथुपीनवक्षा:
समाचित: सोऽधिरथिर्विभाति।
सुपुष्पिताशोकपलाशशाल्मलि-
र्यथाचलश्चन्दनकाननायुत:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
75. चौड़ी और मोटी छाती वाले अधिरथपुत्र कर्ण का शरीर वत्सदंत नामक बाणों से बिंध जाने पर पुष्पित अशोक, पलाश, रेशमी वृक्ष और चंदन के वनों से युक्त पर्वत के समान सुशोभित हो गया।
 
The body of Adhiratha's son Karna, who had a broad and thick chest, became decorated like a mountain with blooming Ashoka, Palash, Silk cotton tree and sandalwood forests after being pierced by the arrows called Vatsadanta. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)