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mahabharat 8.90.74: भरतपुत्र! किरीटधारी अर्जुन ने रथ और घोड़ों सहित कर्ण के शरीर को वत्सदंत नामक बाणों से भर दिया। फिर अपनी पूरी शक्ति लगाकर सुवर्णमय पंख वाले बाणों से सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया। 74.   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  8.90.74 
साश्वं तु कर्णं सरथं किरीटी
समाचिनोद् भारत वत्सदन्तै:।
प्रच्छादयामास दिशश्च बाणै:
सर्वप्रयत्नात्तपनीयपुङ्खै:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
भरतपुत्र! किरीटधारी अर्जुन ने रथ और घोड़ों सहित कर्ण के शरीर को वत्सदंत नामक बाणों से भर दिया। फिर अपनी पूरी शक्ति लगाकर सुवर्णमय पंख वाले बाणों से सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया। 74.
 
Bharata's son! The crown-wearing Arjun filled Karna's body along with the horses and the chariot with arrows called Vatsadanta. Then, using all his might, he covered all directions with arrows having golden feathers. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)