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mahabharat 8.90.7: तत्पश्चात् समस्त कौरवों और सोमकों ने भी देखा कि वहाँ बाणों का एक विशाल जाल फैला हुआ है। उस समय बाणों से उत्पन्न उस भयंकर अंधकार में उन्हें अन्य कोई प्राणी दिखाई नहीं दे रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.90.7 
ततो जालं बाणमयं महान्तं
सर्वेऽद्राक्षु: कुरव: सोमकाश्च।
नान्यं च भूतं ददृशुस्तदा ते
बाणान्धकारे तुमुलेऽथ किंचित्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त कौरवों और सोमकों ने भी देखा कि वहाँ बाणों का एक विशाल जाल फैला हुआ है। उस समय बाणों से उत्पन्न उस भयंकर अंधकार में उन्हें अन्य कोई प्राणी दिखाई नहीं दे रहा था।
 
Thereafter all the Kauravas and Somakas also saw that a huge net of arrows had been spread there. At that time they could not see any other creature in that dreadful darkness caused by the arrows. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)