Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.69: हे प्रभु! महारथी कर्ण अत्यन्त दुःखी होकर अपना तरकश और इन्द्रधनुष के समान विशाल धनुष छोड़कर रथ पर लड़खड़ाकर गिर पड़ा और मूर्छित हो गया। उस समय उसकी मुट्ठी ढीली हो गई थी। | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: शरावापमपास्य सूतजो
धनुश्च तच्छक्रशरासनोपमम्।
ततो रथस्थ: स मुमोह च स्खलन्
प्रशीर्णमुष्टि: सुभृशाहत: प्रभो॥ ६९॥
अनुवाद
हे प्रभु! महारथी कर्ण अत्यन्त दुःखी होकर अपना तरकश और इन्द्रधनुष के समान विशाल धनुष छोड़कर रथ पर लड़खड़ाकर गिर पड़ा और मूर्छित हो गया। उस समय उसकी मुट्ठी ढीली हो गई थी।
O Lord! Being very much hurt, the son of a charioteer, Karna, leaving behind his quiver and his bow which was as big as a rainbow, staggered on his chariot and fell unconscious. At that time his fist had become loose. 69.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥