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mahabharat 8.90.67: अर्जुन के तीव्र वेग और तीक्ष्ण धार वाले अनेक बाणों से घायल होकर कर्ण के शरीर से रक्त बहता हुआ ऐसा शोभायमान हो रहा था, मानो कोई पर्वत लाल गेरू जैसी धातुओं से रंगा हुआ हो और अपने झरनों से लाल जल उगल रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  8.90.67 
दृढाहत: पत्रिभिरुग्रवेगै:
पार्थेन कर्णो विविधै: शिताग्रै:।
बभौ गिरिर्गैरिकधातुरक्त:
क्षरन् प्रपातैरिव रक्तमम्भ:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के तीव्र वेग और तीक्ष्ण धार वाले अनेक बाणों से घायल होकर कर्ण के शरीर से रक्त बहता हुआ ऐसा शोभायमान हो रहा था, मानो कोई पर्वत लाल गेरू जैसी धातुओं से रंगा हुआ हो और अपने झरनों से लाल जल उगल रहा हो।
 
Having been struck by Arjuna's various arrows of great speed and sharp edge, Karna, with blood gushing out from his body, looked as beautiful as a mountain which, being coloured with metals like red ochre, gushes out red water from its springs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)