Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.65: कर्ण का कवच कट जाने पर अर्जुन ने क्रोधित होकर उसे चार तीखे बाणों से पुनः घायल कर दिया। शत्रु द्वारा बुरी तरह घायल होने के कारण कर्ण को वात, पित्त और कफ से उत्पन्न ज्वर (त्रिदोष या संन्यपात) के समान अत्यन्त पीड़ा होने लगी। | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तं विवर्माणमथोत्तमेषुभि:
शितैश्चतुर्भि: कुपित: पराभिनत्।
स विव्यथेऽत्यर्थमरिप्रताडितो
यथातुर: पित्तकफानिलज्वरै:॥ ६५॥
अनुवाद
कर्ण का कवच कट जाने पर अर्जुन ने क्रोधित होकर उसे चार तीखे बाणों से पुनः घायल कर दिया। शत्रु द्वारा बुरी तरह घायल होने के कारण कर्ण को वात, पित्त और कफ से उत्पन्न ज्वर (त्रिदोष या संन्यपात) के समान अत्यन्त पीड़ा होने लगी।
When Karna's armour was cut, Arjuna got angry and injured him again with four very sharp arrows. Being severely injured by the enemy, Karna started feeling great pain like a person suffering from fever (tridosha or sannyapaat) related to Vata, Pitta and Kapha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥