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mahabharat 8.90.64: कर्ण का उत्तम, बहुमूल्य और तेजस्वी कवच, जो श्रेष्ठ शिल्पियों द्वारा बहुत समय से तैयार किया गया था, पाण्डुपुत्र अर्जुन ने क्षण भर में अपने बाणों से टुकड़े-टुकड़े कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  8.90.64 
महाधनं शिल्पिवरै: प्रयत्नत:
कृतं यदस्योत्तमवर्म भास्वरम्।
सुदीर्घकालेन ततोऽस्य पाण्डव:
क्षणेन बाणैर्बहुधा व्यशातयत्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
कर्ण का उत्तम, बहुमूल्य और तेजस्वी कवच, जो श्रेष्ठ शिल्पियों द्वारा बहुत समय से तैयार किया गया था, पाण्डुपुत्र अर्जुन ने क्षण भर में अपने बाणों से टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
The excellent, precious and splendid armour of Karna which had been prepared over a long period of time by the best craftsmen, was broken into many pieces by Pandu's son Arjuna with his arrows in a moment. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)