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mahabharat 8.90.63: कर्ण के सिर का मुकुट, जो बहुमूल्य रत्नों, हीरों और सोने से सुसज्जित था, तथा उसके दो सुन्दर कुण्डल भी अर्जुन के बाणों से टूटकर पृथ्वी पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  8.90.63 
मणिप्रवेकोत्तमवज्रहाटकै-
रलंकृतं चास्य वराङ्गभूषणम्।
प्रविद्धमुर्व्यां निपपात पत्रिभि-
र्धनंजयेनोत्तमकुण्डलेऽपि च॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
कर्ण के सिर का मुकुट, जो बहुमूल्य रत्नों, हीरों और सोने से सुसज्जित था, तथा उसके दो सुन्दर कुण्डल भी अर्जुन के बाणों से टूटकर पृथ्वी पर गिर पड़े।
 
The crown of Karna's head ornament decorated with precious gems, diamonds and gold and his two exquisite earrings also got shattered by Arjun's arrows and fell on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)