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mahabharat 8.90.6: हे नरदेव! उस समय वह सारा प्रदेश चारों ओर से अस्त्र-शस्त्रों से आच्छादित होकर भयंकर प्रतीत हो रहा था। कर्ण और अर्जुन ने अपने बाणों की वर्षा से आकाश को भर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.90.6 
तत्रास्त्रसंघातसमावृतं तदा
बभूव राजंस्तुमुलं स्म सर्वत:।
तत् कर्णपार्थौ शरवृष्टिसंघै-
र्निरन्तरं चक्रतुरम्बरं तदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे नरदेव! उस समय वह सारा प्रदेश चारों ओर से अस्त्र-शस्त्रों से आच्छादित होकर भयंकर प्रतीत हो रहा था। कर्ण और अर्जुन ने अपने बाणों की वर्षा से आकाश को भर दिया।
 
O lord of men! At that time the whole region appeared terrifying from all sides, being covered with a mass of weapons. Karna and Arjuna filled the sky with a shower of their arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)