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mahabharat 8.90.58: उस उत्तम बाण ने बड़ी सटीकता से छोड़ा और कर्ण के अद्वितीय कवच को फाड़ डाला, मानो उसके प्राण हरण कर रहा हो, और फिर वह पृथ्वी में धंस गया। उस समय उसके पंख रक्त से भीगे हुए थे। 58.   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.90.58 
स चित्रवर्मेषुवरो विदार्य
प्राणान्निरस्यन्निव साधुमुक्त:।
कर्णस्य पीत्वा रुधिरं विवेश
वसुन्धरां शोणितदिग्धवाज:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
उस उत्तम बाण ने बड़ी सटीकता से छोड़ा और कर्ण के अद्वितीय कवच को फाड़ डाला, मानो उसके प्राण हरण कर रहा हो, और फिर वह पृथ्वी में धंस गया। उस समय उसके पंख रक्त से भीगे हुए थे। 58.
 
That excellent arrow, released with great accuracy, tore apart Karna's unique armour, and drank his blood as if taking away his life, and then it sank into the earth. At that time its wings were soaked in blood. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)