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mahabharat 8.90.56: उस समय वीर कर्ण ने धनंजय की ओर देखते हुए, मोर पंख लगे तथा शिला पर तीखे किये हुए दस बाणों से उसे घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  8.90.56 
तस्मिन् मुहूर्ते दशभि: पृषत्कै:
शिलाशितैर्बर्हिणबर्हवाजितै:।
विव्याध कर्ण: पुरुषप्रवीरो
धनंजयं तिर्यगवेक्षमाण:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
उस समय वीर कर्ण ने धनंजय की ओर देखते हुए, मोर पंख लगे तथा शिला पर तीखे किये हुए दस बाणों से उसे घायल कर दिया।
 
At that moment the heroic Karna, looking sideways at Dhananjaya, wounded him with ten arrows fitted with peacock feathers and sharpened on a rock.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)