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mahabharat 8.90.53: उस शत्रुता को स्मरण करके यह सर्प अपनी मृत्यु के लिए आपसे युद्ध करना चाहता है। हे शत्रुसूदन! इस सर्प को देखो, जो आकाश से गिरते हुए प्रज्वलित उल्का के समान आ रहा है।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  8.90.53 
स एष तद् वैरमनुस्मरन् वै
त्वां प्रार्थयत्यात्मवधाय नूनम्।
नभश्च्युतां प्रज्वलितामिवोल्कां
पश्यैनमायान्तममित्रसाह॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उस शत्रुता को स्मरण करके यह सर्प अपनी मृत्यु के लिए आपसे युद्ध करना चाहता है। हे शत्रुसूदन! इस सर्प को देखो, जो आकाश से गिरते हुए प्रज्वलित उल्का के समान आ रहा है।
 
Remembering that enmity, this snake definitely wants to fight with you for his own death. O Shatrusudan! Look at this snake coming like a blazing meteor falling from the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)