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mahabharat 8.90.50-51: तब भगवान कृष्ण ने युद्धभूमि में अर्जुन से कहा, "यह विशाल सर्प तुम्हारा शत्रु है। तुम इसका वध करो।" भगवान मधुसूदन की यह बात सुनकर, गांडीवधारी और शत्रुओं के पराक्रम का सामना करते हुए अर्जुन ने पूछा, "हे प्रभु! यह कौन सर्प है जो आज मेरे पास आया है? जो स्वयं गरुड़ के मुख में आ गया है?"   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 50-51
 
 
श्लोक  8.90.50-51 
तत: कृष्ण: पार्थमुवाच संख्ये
महोरगं कृतवैरं जहि त्वम्॥ ५०॥
स एवमुक्तो मधुसूदनेन
गाण्डीवधन्वा रिपुवीर्यसाह:।
उवाच को ह्येष ममाद्य नाग:
स्वयं स आयाद् गरुडस्य वक्त्रम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान कृष्ण ने युद्धभूमि में अर्जुन से कहा, "यह विशाल सर्प तुम्हारा शत्रु है। तुम इसका वध करो।" भगवान मधुसूदन की यह बात सुनकर, गांडीवधारी और शत्रुओं के पराक्रम का सामना करते हुए अर्जुन ने पूछा, "हे प्रभु! यह कौन सर्प है जो आज मेरे पास आया है? जो स्वयं गरुड़ के मुख में आ गया है?"
 
Then Lord Krishna said to Arjuna on the battlefield, "This huge serpent is your enemy. You kill him." On hearing this from Lord Madhusudan, Arjuna, wielding the Gandiva and facing the might of the enemies, asked, "O Lord! Who is this serpent that has come to me today? Who has himself come into the mouth of Garuda?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)