Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.45: कर्ण! तुमने सोच-समझकर मुझे नहीं छोड़ा, इसीलिए मैं अर्जुन का सिर नहीं उठा सका। अब तुम सोच-समझकर और ठीक से निशाना लगाकर मुझे शीघ्र ही युद्धभूमि में छोड़ दो, तब मैं अपने और तुम्हारे उस शत्रु का वध करूँगा।॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्ण! तुमने सोच-समझकर मुझे नहीं छोड़ा, इसीलिए मैं अर्जुन का सिर नहीं उठा सका। अब तुम सोच-समझकर और ठीक से निशाना लगाकर मुझे शीघ्र ही युद्धभूमि में छोड़ दो, तब मैं अपने और तुम्हारे उस शत्रु का वध करूँगा।॥ 45॥
Karna! You did not release me after giving due thought; that is why I could not abduct Arjun's head. Now, after giving due thought and aiming properly, release me quickly on the battlefield, then I will kill that enemy of mine and yours.'॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥