Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.43: वह बहुमूल्य बाण, जो कर्ण के हाथ से छूट गया था और अग्नि तथा सूर्य के समान तेजस्वी था, वास्तव में अर्जुन का शत्रु एक महान सर्प था, उसके मुकुट पर वार करके वहाँ से लौट गया ॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह बहुमूल्य बाण, जो कर्ण के हाथ से छूट गया था और अग्नि तथा सूर्य के समान तेजस्वी था, वास्तव में अर्जुन का शत्रु एक महान सर्प था, उसके मुकुट पर वार करके वहाँ से लौट गया ॥ 43॥
That precious arrow, which had been released from Karna's hand and was as effulgent as the fire and the sun, was in reality a great serpent inimical to Arjuna, after striking his crown, returned from there. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥