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mahabharat 8.90.37-38: वह सुवर्णमयी जाली से विभूषित चमकीला मुकुट बड़े जोर से धड़ाम से पृथ्वी पर गिर पड़ा। जैसे लाल रंग का सूर्य क्षितिज से गिर पड़ता है, उसी प्रकार पार्थ का प्रिय, उत्तम एवं तेजस्वी मुकुट भी पूर्वोक्त उत्तम बाण से घायल होकर तथा विषैली अग्नि से प्रज्वलित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  8.90.37-38 
तद्धेमजालावततं सुघोषं
जाज्वल्यमानं निपपात भूमौ॥ ३७॥
तदुत्तमेषून्मथितं विषाग्निना
प्रदीप्तमर्चिष्मदथो क्षितौ प्रियम्।
पपात पार्थस्य किरीटमुत्तमं
दिवाकरोऽस्तादिव रक्तमण्डल:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वह सुवर्णमयी जाली से विभूषित चमकीला मुकुट बड़े जोर से धड़ाम से पृथ्वी पर गिर पड़ा। जैसे लाल रंग का सूर्य क्षितिज से गिर पड़ता है, उसी प्रकार पार्थ का प्रिय, उत्तम एवं तेजस्वी मुकुट भी पूर्वोक्त उत्तम बाण से घायल होकर तथा विषैली अग्नि से प्रज्वलित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा।
 
That glittering crown, adorned with golden lattice, fell to the earth with a loud bang. Just as the red-coloured sun falls from the horizon, so too Partha's beloved, excellent and illustrious crown, struck by the aforementioned excellent arrow and ablaze with the poisonous fire, fell to the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)