Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.33: सूतपुत्र कर्ण ने सर्पमुख बाण बनाने में सफलता पाकर, बड़े प्रयत्न और क्रोध से उस बाण का प्रयोग किया, जिससे अर्जुन के सिर से वह मुकुट उतर गया जो सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि के समान तेजस्वी था और सोने, चाँदी, मणि और हीरों से विभूषित था। 33॥ | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूतपुत्र कर्ण ने सर्पमुख बाण बनाने में सफलता पाकर, बड़े प्रयत्न और क्रोध से उस बाण का प्रयोग किया, जिससे अर्जुन के सिर से वह मुकुट उतर गया जो सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि के समान तेजस्वी था और सोने, चाँदी, मणि और हीरों से विभूषित था। 33॥
Suta's son Karna, with the help of success in making the serpent-headed arrow, great effort and anger, used the arrow which brought down from Arjuna's head the crown which was as bright as the sun, moon and fire and adorned with gold, silver, gems and diamonds. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥