Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.19: जब कर्ण युद्ध में अर्जुन से अधिक पराक्रम नहीं दिखा सका और अर्जुन ने अपने बाणों के प्रहार से उसे अत्यन्त पीड़ा पहुँचा दी, तब चूँकि उसका सारा शरीर बाणों के प्रहार से घायल हो गया था, इसलिए वीर कर्ण ने सर्पमुख बाण से आक्रमण करने का विचार किया। | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्णोऽथ पार्थं न विशेषयद् यदा
भृशं च पार्थेन शराभितप्त:।
ततस्तु वीर: शरविक्षताङ्गो
दध्रे मनो ह्येकशयस्य तस्य॥ १९॥
अनुवाद
जब कर्ण युद्ध में अर्जुन से अधिक पराक्रम नहीं दिखा सका और अर्जुन ने अपने बाणों के प्रहार से उसे अत्यन्त पीड़ा पहुँचा दी, तब चूँकि उसका सारा शरीर बाणों के प्रहार से घायल हो गया था, इसलिए वीर कर्ण ने सर्पमुख बाण से आक्रमण करने का विचार किया।
When Karna could not show more valour than Arjuna in the war and Arjuna made him very tormented by the attack of his arrows, then because his whole body was wounded by the attack of the arrows, brave Karna thought of attacking with the snake-headed arrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥