Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.12-13: राजन! उस समय घोर युद्ध में जब रथ, घोड़े और हाथियों द्वारा सम्पूर्ण पृथ्वी रौंदी जा रही थी, उस समय पाताल में निवास करने वाला तथा अर्जुन से द्वेष रखने वाला अश्वसेन नामक सर्प, जो खाण्डव दह के समय बच गया था और क्रोधपूर्वक पृथ्वी में प्रविष्ट हो गया था, कर्ण और अर्जुन का युद्ध देखकर बड़े वेग से उछलकर युद्धभूमि में पहुँच गया; उसमें उड़ने की भी शक्ति थी॥12-13॥ | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! उस समय घोर युद्ध में जब रथ, घोड़े और हाथियों द्वारा सम्पूर्ण पृथ्वी रौंदी जा रही थी, उस समय पाताल में निवास करने वाला तथा अर्जुन से द्वेष रखने वाला अश्वसेन नामक सर्प, जो खाण्डव दह के समय बच गया था और क्रोधपूर्वक पृथ्वी में प्रविष्ट हो गया था, कर्ण और अर्जुन का युद्ध देखकर बड़े वेग से उछलकर युद्धभूमि में पहुँच गया; उसमें उड़ने की भी शक्ति थी॥12-13॥
King! At that time, in the fierce battle, when the entire earth was being trampled by chariots, horses and elephants, at that time, a serpent named Ashwasen, who resided in the netherworld and was hostile towards Arjun and who had survived at the time of Khandava Daha and had entered the earth in anger, seeing the fight between Karna and Arjun, jumped up with great speed and reached the battlefield; he also had the power to fly.॥ 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥