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mahabharat 8.90.116: पाण्डुपुत्र! मैं वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण से या आपसे तनिक भी भयभीत नहीं हूँ। आप क्षत्रियपुत्र हैं, उच्च कुल का नाम रोशन करते हैं; इसीलिए मैं आपसे यह कह रहा हूँ। पाण्डवों! आप मुझे क्षण भर के लिए क्षमा कर दीजिए। 116॥   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  8.90.116 
न वासुदेवात् त्वत्तो वा पाण्डवेय बिभेम्यहम्।
त्वं हि क्षत्रियदायादो महाकुलविवर्धन:।
अतस्त्वां प्रब्रवीम्येष मुहूर्तं क्षम पाण्डव॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! मैं वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण से या आपसे तनिक भी भयभीत नहीं हूँ। आप क्षत्रियपुत्र हैं, उच्च कुल का नाम रोशन करते हैं; इसीलिए मैं आपसे यह कह रहा हूँ। पाण्डवों! आप मुझे क्षण भर के लिए क्षमा कर दीजिए। 116॥
 
Son of Pandu! I am not at all afraid of Vasudevanandan Shri Krishna or you. You are the son of a Kshatriya, you bring glory to a high clan; That's why I tell you this. Pandavas! Please forgive me for a moment. 116॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कर्णरथचक्रग्रसने नवतितमोऽध्याय:॥ ९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें कर्णके रथके पहियेका पृथ्वीमें फँसना—इसविषयसे सम्बन्ध रखनेवाला नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९०॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ११८ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)