श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 113-114
 
 
श्लोक  8.90.113-114 
त्वं च शूरतमो लोके साधुवृत्तश्च पाण्डव॥ ११३॥
अभिज्ञो युद्धधर्माणां वेदान्तावभृथाप्लुत:।
दिव्यास्त्रविदमेयात्मा कार्तवीर्यसमो युधि॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! आप संसार में महान योद्धा एवं धर्मात्मा माने जाते हैं। क्या आप युद्ध के सिद्धांतों को जानते हैं? वेदान्त के अध्ययनरूपी यज्ञ को पूर्ण करके आप उसमें स्नान कर चुके हैं। आपको दिव्यास्त्रों का ज्ञान है। आप अपार आत्मबल से सम्पन्न हैं और युद्धभूमि में कार्तवीर्य अर्जुन के समान पराक्रमी हैं। 113-114॥
 
Pandunandan! You are considered a great warrior and virtuous person in the world. Do you know the principles of war? After completing the yajna of study of Vedanta, you have already taken bath in it. You have knowledge of divine weapons. You are full of immeasurable self-power and are as brave as Kartavirya Arjuna in the battlefield. 113-114॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)