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mahabharat 8.90.110-111h: कुन्तीनन्दन! कायरों के मार्ग का अनुसरण मत करो; क्योंकि तुम युद्ध में विशिष्ट योद्धा के रूप में प्रसिद्ध हो। पाण्डुनन्दन! तुम्हें और भी विशिष्ट सिद्ध होना चाहिए। 110 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 110-111h
 
 
श्लोक  8.90.110-111h 
न त्वं कापुरुषाचीर्णं मार्गमास्थातुमर्हसि।
ख्यातस्त्वमसि कौन्तेय विशिष्टो रणकर्मसु॥ ११०॥
विशिष्टतरमेव त्वं कर्तुमर्हसि पाण्डव।
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! कायरों के मार्ग का अनुसरण मत करो; क्योंकि तुम युद्ध में विशिष्ट योद्धा के रूप में प्रसिद्ध हो। पाण्डुनन्दन! तुम्हें और भी विशिष्ट सिद्ध होना चाहिए। 110 1/2॥
 
Kuntinandan! Don't follow the path that cowards follow; Because you are famous as a special warrior in war. Pandunandan! You must prove yourself even more special. 110 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)