Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.90.103-104: तब शत्रुओं को संताप देने वाले अर्जुन ने अग्नि के समान भयंकर लौह और सर्पविष से युक्त दिव्य बाण मंगवाया, उसमें रुद्रास्त्र भरकर कर्ण पर छोड़ने का विचार किया। नरेश्वर! इतने में ही पृथ्वी ने राधापुत्र कर्ण के चक्र को जकड़ लिया। 103-104॥ | mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब शत्रुओं को संताप देने वाले अर्जुन ने अग्नि के समान भयंकर लौह और सर्पविष से युक्त दिव्य बाण मंगवाया, उसमें रुद्रास्त्र भरकर कर्ण पर छोड़ने का विचार किया। नरेश्वर! इतने में ही पृथ्वी ने राधापुत्र कर्ण के चक्र को जकड़ लिया। 103-104॥
Then Arjuna, who torments the enemies, summoned a divine arrow filled with iron, fierce as fire and snake poison, infused it with the Rudrastra and thought of releasing it at Karna. Nareshwar! Meanwhile, the earth gripped the wheel of Radha's son Karna. 103-104॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥