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mahabharat 8.90.101: कर्ण ने अपने ही अस्त्रों से सव्यसाची अर्जुन के अस्त्रों को नष्ट कर दिया और अपने पराक्रम का परिचय देकर स्वयं को अर्जुन से भी अधिक शक्तिशाली सिद्ध किया ॥101॥   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  8.90.101 
अस्त्रैरस्त्राणि संवार्य प्रनिघ्नन् सव्यसाचिन:।
चक्रे चाप्यधिकं पार्थात् स्ववीर्यमतिदर्शयन्॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने अपने ही अस्त्रों से सव्यसाची अर्जुन के अस्त्रों को नष्ट कर दिया और अपने पराक्रम का परिचय देकर स्वयं को अर्जुन से भी अधिक शक्तिशाली सिद्ध किया ॥101॥
 
Karna, by his own weapons, warded off the weapons of Savyasachi Arjuna and destroyed them all. By displaying his prowess, he proved himself to be more powerful than Arjuna. ॥101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)