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mahabharat 8.90.1: संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात भागते हुए कौरव, जिनकी सेना तितर-बितर हो गई थी, धनुष से छोड़े गए बाण की दूरी तक खड़े हो गए। वहाँ से उन्होंने देखा कि अर्जुन का अस्त्र बड़े वेग से चल रहा था और बिजली की तरह चमक रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.90.1 
संजय उवाच
तत: प्रयाता: शरपातमात्र-
मवस्थिता: कुरवो भिन्नसेना:।
विद्युत्प्रकाशं ददृशु: समन्ताद्
धंनजयास्त्रं समुदीर्यमाणम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात भागते हुए कौरव, जिनकी सेना तितर-बितर हो गई थी, धनुष से छोड़े गए बाण की दूरी तक खड़े हो गए। वहाँ से उन्होंने देखा कि अर्जुन का अस्त्र बड़े वेग से चल रहा था और बिजली की तरह चमक रहा था।
 
Sanjaya says - O King! Thereafter the fleeing Kauravas, whose army was scattered, stood at the distance as far as an arrow shot from the bow can reach. From there they saw that Arjuna's weapon was moving with great speed and was flashing like lightning all around.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)