Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.9.65-68h: संजय! जो गाण्डीव धनुष से छूटे हुए बाणों के प्रभाव की तनिक भी परवाह न करते हुए कुन्तीपुत्रों की ओर देखकर कहते थे कि 'कृष्ण! अब तुम पतिहीन हो गए हो', जिन्होंने अपनी भुजबल पर भरोसा करके पाण्डवों तथा उनके पुत्रों सहित भगवान श्रीकृष्ण को भी दो क्षण के लिए भी नहीं डराया। पिताश्री! यदि इन्द्र सहित समस्त देवता शत्रुपक्ष से आक्रमण करें, तो भी मुझे विश्वास न होता कि वे भी कर्ण को मार डालेंगे, फिर पाण्डवों की तो बात ही क्या?॥ 65-67 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय! जो गाण्डीव धनुष से छूटे हुए बाणों के प्रभाव की तनिक भी परवाह न करते हुए कुन्तीपुत्रों की ओर देखकर कहते थे कि 'कृष्ण! अब तुम पतिहीन हो गए हो', जिन्होंने अपनी भुजबल पर भरोसा करके पाण्डवों तथा उनके पुत्रों सहित भगवान श्रीकृष्ण को भी दो क्षण के लिए भी नहीं डराया। पिताश्री! यदि इन्द्र सहित समस्त देवता शत्रुपक्ष से आक्रमण करें, तो भी मुझे विश्वास न होता कि वे भी कर्ण को मार डालेंगे, फिर पाण्डवों की तो बात ही क्या?॥ 65-67 1/2॥
Sanjaya! The one who did not care at all about the impact of the arrows shot from the Gandiva bow and looked at the sons of Kunti saying, 'Krishna! Now you are without a husband', who, relying on his arm strength, never feared even the Pandavas and Lord Krishna along with their sons for even two moments. Father! If all the gods including Indra attack from the enemy side, then I would not have believed that even they would kill Karna, then what about the Pandavas?॥ 65-67 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥