| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना » श्लोक 64-65h |
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| | | | श्लोक 8.9.64-65h  | किं करिष्यति गाण्डीवमक्षय्यौ च महेषुधी।
स्निग्धचन्दनदिग्धस्य मच्छरस्याभिधावत:॥ ६४॥
स नूनमृषभस्कन्धो ह्यर्जुनेन कथं हत:। | | | | | | अनुवाद | | मेरे उस बाण को गांडीव धनुष या दोनों अक्षय तरकश क्या कर सकेंगे, जो चिकने चंदन से लिपटा हुआ, बड़े वेग से शत्रुओं पर आक्रमण करता है। ऐसा वचन कहने वाला और बैल के समान दृढ़ कन्धों वाला कर्ण अर्जुन के द्वारा कैसे मारा जा सकता है?॥64 1/2॥ | | | | What will the Gandiva bow or both the inexhaustible quivers do to my arrow, which, smeared with smooth sandalwood, attacks the enemies with great speed' How could Karna, who had said such words and whose shoulders were as strong as those of a bull, indeed be killed by Arjuna?॥ 64 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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