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mahabharat 8.9.56-57h: मैं उसके विनाश का कोई अन्य कारण नहीं देखता, सिवाय उस महान योद्धा के, जिसने यह भयंकर प्रतिज्ञा की थी कि 'जब तक मैं अर्जुन को नहीं मार डालूँगा, तब तक मैं दूसरों को अपने पैर नहीं धोने दूँगा।' 56 1/2   |   mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  8.9.56-57h 
न ह्यन्यदपि पश्यामि कारणं तस्य नाशने।
न हन्मि फाल्गुनं यावत् तावत् पादौ न धावये॥ ५६॥
इति यस्य महाघोरं व्रतमासीन्महात्मन:।
 
 
अनुवाद
मैं उसके विनाश का कोई अन्य कारण नहीं देखता, सिवाय उस महान योद्धा के, जिसने यह भयंकर प्रतिज्ञा की थी कि 'जब तक मैं अर्जुन को नहीं मार डालूँगा, तब तक मैं दूसरों को अपने पैर नहीं धोने दूँगा।' 56 1/2
 
I don't see any other reason for his destruction than that great warrior who had taken a terrible vow that 'I will not let others wash my feet until I kill Arjun.' 56 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)