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mahabharat 8.9.52-53h: यदि उसका रथ नहीं टूटा था, उसका धनुष नहीं टूटा था और उसके हथियार नष्ट नहीं हुए थे, तो शत्रुओं ने उसे कैसे मारा? ॥52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  8.9.52-53h 
रथभङ्गो न चेत् तस्य धनुर्वा न व्यशीर्यत॥ ५२॥
न चेदस्त्राणि निर्णेशु: स कथं निहत: परै:।
 
 
अनुवाद
यदि उसका रथ नहीं टूटा था, उसका धनुष नहीं टूटा था और उसके हथियार नष्ट नहीं हुए थे, तो शत्रुओं ने उसे कैसे मारा? ॥52 1/2॥
 
If his chariot was not broken, his bow was not broken and his weapons were not destroyed, then how did the enemies kill him? ॥ 52 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)