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mahabharat 8.9.4-5: वह महाबली योद्धा जिसने युधिष्ठिर की सेना और पांचाल रथियों के समूह को मारकर अपनी बाणों की वर्षा से सम्पूर्ण दिशाओं को भयभीत कर दिया था और जिसने वज्रधारी इन्द्र के समान दैत्यों को मूर्छित कर दिया था, उसी प्रकार जिसने युद्धभूमि में कुन्तीपुत्रों को मोहित कर लिया था, वह मारा जाने पर आँधी से उखड़े हुए वृक्ष के समान भूमि पर कैसे पड़ा है?॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  8.9.4-5 
हत्वा युधिष्ठिरानीकं पञ्चालानां रथव्रजान्।
प्रताप्य शरवर्षेण दिश: सर्वा महारथ:॥ ४॥
मोहयित्वा रणे पार्थान् वज्रहस्त इवासुरान्।
स कथं निहत: शेते वायुरुग्ण इव द्रुम:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वह महाबली योद्धा जिसने युधिष्ठिर की सेना और पांचाल रथियों के समूह को मारकर अपनी बाणों की वर्षा से सम्पूर्ण दिशाओं को भयभीत कर दिया था और जिसने वज्रधारी इन्द्र के समान दैत्यों को मूर्छित कर दिया था, उसी प्रकार जिसने युद्धभूमि में कुन्तीपुत्रों को मोहित कर लिया था, वह मारा जाने पर आँधी से उखड़े हुए वृक्ष के समान भूमि पर कैसे पड़ा है?॥4-5॥
 
That mighty warrior who, after killing Yudhishthira's army and the group of Panchala charioteers, had frightened all directions with his shower of arrows, and who, like the thunderbolt-wielding Indra, rendered the demons unconscious, in the same way, had bewitched the sons of Kunti on the battlefield, how is he, after being killed, lying on the ground like a tree uprooted by a storm?॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)