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mahabharat 8.9.24-27h: बाणों की शय्या पर सोए हुए भीष्म ने अर्जुन से जल माँगा और उसके लिए उन्होंने पृथ्वी को छेद दिया। पाण्डुपुत्र अर्जुन द्वारा उत्पन्न जल की धारा देखकर महाबाहु भीष्म ने दुर्योधन से कहा, 'हे भाई! पाण्डवों के साथ संधि कर लो। संधि से शत्रुता शांत हो जाएगी और तुम दोनों के बीच का यह युद्ध मेरे प्राणों से समाप्त हो जाएगा। पाण्डवों के साथ भ्रातृत्व का व्यवहार रखो और पृथ्वी का आनन्द लो।'॥24-26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 24-27h
 
 
श्लोक  8.9.24-27h 
शरतल्पे शयानेन भीष्मेण सुमहात्मना॥ २४॥
पानीयं याचित: पार्थ: सोऽविध्यन्मेदिनीतलम्।
जलस्य धारां जनितां दृष्ट्वा पाण्डुसुतेन च॥ २५॥
अब्रवीत् स महाबाहुस्तात संशाम्य पाण्डवै:।
प्रशमाद्धि भवेच्छान्तिर्मदन्तं युद्धमस्तु व:॥ २६॥
भ्रातृभावेन पृथिवीं भुङ्क्ष्व पाण्डुसुतै: सह।
 
 
अनुवाद
बाणों की शय्या पर सोए हुए भीष्म ने अर्जुन से जल माँगा और उसके लिए उन्होंने पृथ्वी को छेद दिया। पाण्डुपुत्र अर्जुन द्वारा उत्पन्न जल की धारा देखकर महाबाहु भीष्म ने दुर्योधन से कहा, 'हे भाई! पाण्डवों के साथ संधि कर लो। संधि से शत्रुता शांत हो जाएगी और तुम दोनों के बीच का यह युद्ध मेरे प्राणों से समाप्त हो जाएगा। पाण्डवों के साथ भ्रातृत्व का व्यवहार रखो और पृथ्वी का आनन्द लो।'॥24-26 1/2॥
 
The great Bhishma, asleep on his bed of arrows, asked Arjuna for water, and he pierced the earth for it. Seeing the stream of water produced by Arjuna, the son of Pandu, the mighty-armed Bhishma said to Duryodhan, 'My dear brother, make a treaty with the Pandavas. The enmity will be pacified by the treaty, and this war between you two will end with my life. Maintain brotherly relations with the Pandavas and enjoy the earth.'॥ 24–26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)