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mahabharat 8.9.23-24h: युधिष्ठिर सदैव कहते रहे, "युद्ध मत करो।" किन्तु मूर्ख दुर्योधन ने उनकी बातों को लाभदायक औषधि के रूप में स्वीकार नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  8.9.23-24h 
युधिष्ठिरस्य वचनं मा युध्यस्वेति सर्वदा॥ २३॥
दुर्योधनो नाभ्यगृह्णान्मूढ: पथ्यमिवौषधम्।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर सदैव कहते रहे, "युद्ध मत करो।" किन्तु मूर्ख दुर्योधन ने उनकी बातों को लाभदायक औषधि के रूप में स्वीकार नहीं किया।
 
Yudhishthira always kept saying, "Don't fight the war." But the foolish Duryodhan did not accept his words as a beneficial medicine. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)