श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  8.89.d5 
दुर्योधन उवाच
भो क्षत्रिया: शूरतमास्तु सर्वे
क्षात्रे च धर्मे निरता: स्थ यूयम्।
न युक्तरूपं भवतां समीपात्
पलायनं कर्णमिह प्रहाय॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- क्षत्रियो! आप सभी वीर और क्षत्रिय धर्म परायण हैं। कर्ण को यहाँ छोड़कर भागना आपके लिए उचित नहीं है।
 
Duryodhan said- Kshatriyas! All of you are brave and devoted to Kshatriya Dharma. It is not right for you to leave Karna here and run away from him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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