Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.89.92: उसने जलते हुए बाण छोड़े जो उसके शरीर को नष्ट कर रहे थे और कर्ण के महत्वपूर्ण अंगों में गहरे धंस गए। कर्ण शोक से व्याकुल हो गया, लेकिन ईश्वर की कृपा से किसी तरह युद्धभूमि में डटा रहा।   |   mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  8.89.92 
स कर्णमाकर्णविकृष्टसृष्टै:
शरै: शरीरान्तकरैर्ज्वलद्भि:।
मर्मस्वविध्यत् स चचाल दु:खाद्
दैवादवातिष्ठत धैर्यबुद्धि:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
उसने जलते हुए बाण छोड़े जो उसके शरीर को नष्ट कर रहे थे और कर्ण के महत्वपूर्ण अंगों में गहरे धंस गए। कर्ण शोक से व्याकुल हो गया, लेकिन ईश्वर की कृपा से किसी तरह युद्धभूमि में डटा रहा।
 
He shot flaming arrows that destroyed his body and shot them deep into Karna's vital organs. Karna was distraught with grief, but somehow managed to stay firm on the battlefield by the grace of God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)