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निर्मुक्तसर्पप्रतिमैरभीक्ष्णं
तैलप्रधौतै: खगपत्रवाजै:॥ ७५॥
षष्टॺा बिभेदाशु च वासुदेव-
मनन्तरं फाल्गुनमष्टभिश्च।
अनुवाद
फिर उसने तेल से स्नान किया, पक्षियों के पंख पहने और वसुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण को केंचुली उतारते हुए साठ बाणों से घायल कर दिया। इसके बाद उसने अर्जुन पर फिर से आठ बाण छोड़े।
Then he washed himself with oil and put on the feathers of birds and instantly wounded Sri Krishna, the son of Vasudeva, with sixty arrows, which looked like serpents shedding their skin. After this, he again shot eight arrows at Arjuna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥