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mahabharat 8.89.6: जैसे कमल, कुमुदिनी, मत्स्य और कछुओं से भरे हुए तथा पक्षियों के झुंड से आच्छादित दो बड़े-बड़े सरोवर, वायु के वेग से प्रवाहित होकर एक-दूसरे से सटे हुए आकर मिलते हैं, उसी प्रकार ध्वजाओं से सुशोभित उनके दो रथ आपस में टकरा गए॥6॥   |   mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.89.6 
प्रभूतपद्मोत्पलमत्स्यकच्छपौ
महाह्रदौ पक्षिगणैरिवावृतौ।
सुसंनिकृष्टावनिलोद्धतौ यथा
तथा रथौ तौ ध्वजिनौ समीयतु:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जैसे कमल, कुमुदिनी, मत्स्य और कछुओं से भरे हुए तथा पक्षियों के झुंड से आच्छादित दो बड़े-बड़े सरोवर, वायु के वेग से प्रवाहित होकर एक-दूसरे से सटे हुए आकर मिलते हैं, उसी प्रकार ध्वजाओं से सुशोभित उनके दो रथ आपस में टकरा गए॥6॥
 
Just as two large lakes, filled with abundant lotuses, lily trees, fishes and tortoises and covered with flocks of birds, adjoining each other, driven by the wind, come together, similarly their two chariots, decorated with flags, collided with each other. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)