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mahabharat 8.89.56-57h: उस दिव्य अस्त्र से भाले, कुल्हाड़ी, चक्र और सैकड़ों बाण जैसे और भी भयंकर अस्त्र प्रकट होने लगे, जो सब ओर के योद्धाओं का विनाश करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  8.89.56-57h 
ततश्च शूलानि परश्वधानि
चक्राणि नाराचशतानि चैव॥ ५६॥
निश्चक्रमुर्घोरतराणि योधा-
स्ततो ह्यहन्यन्त समन्ततोऽपि।
 
 
अनुवाद
उस दिव्य अस्त्र से भाले, कुल्हाड़ी, चक्र और सैकड़ों बाण जैसे और भी भयंकर अस्त्र प्रकट होने लगे, जो सब ओर के योद्धाओं का विनाश करने लगे।
 
From that divine weapon began to appear more dreadful weapons like spears, axes, discus and hundreds of arrows, which started destroying the warriors on all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)