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श्लोक 8.89.38  |
पूर्वं देवैरजितं कालकेयै:
साक्षात् स्थाणोर्बाहुसंस्पर्शमेत्य।
कथं नु त्वां सूतपुत्र: किरीटि-
न्नथेषुभिर्दशभि: प्रागविद्धॺत्॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| किरीटधारी अर्जुन! पूर्वकाल में देवता भी तुम्हें परास्त नहीं कर सके थे। कालकेय नामक राक्षस भी तुम्हें परास्त नहीं कर सका था। तुम स्वयं भगवान शिव की भुजाओं से युद्ध कर चुके हो, फिर भी इस सारथीपुत्र ने तुम्हें दस बाणों से कैसे बींध डाला?॥38॥ |
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| Crown-wearing Arjun! Even the gods could not defeat you in the past. Even the demon Kalkeya could not defeat you. You have fought with the arms of Lord Shiva himself, yet how did this son of a charioteer pierce you with ten arrows in the first place?॥ 38॥ |
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