श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  8.89.37 
कथं नु पापोऽयमपेतधर्म:
सूतात्मज: समरेऽद्य प्रसह्य।
पञ्चालानां योधमुख्याननेकान्
निजघ्निवांस्तव जिष्णो समक्षम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! धर्म से विमुख इस पापी सारथिपुत्र कर्ण ने आज युद्धभूमि में तुम्हारे देखते-देखते इतने बड़े-बड़े पांचाल योद्धाओं को कैसे मार डाला?
 
Victorious Arjuna! How did this sinful charioteer's son Karna, who was away from Dharma, kill so many prominent Panchalaya warriors in front of your eyes in the battlefield today?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)