श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.89.31 
तान् सूतपुत्रो निजघान बाणै:
पञ्चालानां रथनागाश्वसंघान्।
अभ्यर्दयद् बाणगणै: प्रसह्य
विद्‍ध्वा हर्षात् सङ्गरे सूतपुत्र:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
परन्तु उस रणभूमि में महारथी कर्ण ने बड़े हर्ष और उत्साह के साथ पांचालों के रथियों, हाथीसवारों और घुड़सवारों को बाणों की वर्षा से घायल करके उन्हें अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई और अपने बाणों से उनका वध कर दिया॥31॥
 
But in that battle-field, Karna, the son of a charioteer, with great joy and enthusiasm, wounded the charioteers, elephant riders and horse-riders of the Panchalas with a shower of arrows, causing them great pain and killed them with his arrows.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)