Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.89.26: जैसे गरुड़ से भयभीत सर्प पृथ्वी को भेदकर उसके भीतर घुस जाते हैं, वैसे ही वे तीक्ष्ण अस्त्र उपरोक्त वस्तुओं को भेदकर शीघ्र ही उनके भीतर समा गए। कर्ण के सारे शरीर बाणों से भर गए। सारा शरीर रक्त से नहा गया। इस कारण उस समय क्रोध से उसकी आँखें घूमने लगीं। | mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे गरुड़ से भयभीत सर्प पृथ्वी को भेदकर उसके भीतर घुस जाते हैं, वैसे ही वे तीक्ष्ण अस्त्र उपरोक्त वस्तुओं को भेदकर शीघ्र ही उनके भीतर समा गए। कर्ण के सारे शरीर बाणों से भर गए। सारा शरीर रक्त से नहा गया। इस कारण उस समय क्रोध से उसकी आँखें घूमने लगीं।
Just as snakes scared of Garuda pierce the earth and enter inside it, similarly those sharp weapons pierced the above mentioned things and soon got inside them. All the body parts of Karna were filled with arrows. The whole body was bathed in blood. Due to this his eyes started rolling with anger at that time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥