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mahabharat 8.89.17: तब इन्द्रकुमार अर्जुन ने शत्रुसंहारक अस्त्र का प्रयोग कर्ण पर किया। उस अस्त्र का रूप पृथ्वी, आकाश, दिशा और सूर्य के मार्ग में फैल गया और वहाँ प्रज्वलित हो गया। 17॥   |   mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.89.17 
ततोऽस्त्रमाग्नेयममित्रसाधनं
मुमोच कर्णाय महेन्द्रसूनु:।
भूम्यन्तरिक्षे च दिशोऽर्कमार्गं
प्रावृत्य देहोऽस्य बभूव दीप्त:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्रकुमार अर्जुन ने शत्रुसंहारक अस्त्र का प्रयोग कर्ण पर किया। उस अस्त्र का रूप पृथ्वी, आकाश, दिशा और सूर्य के मार्ग में फैल गया और वहाँ प्रज्वलित हो गया। 17॥
 
Then Indrakumar Arjun used the enemy-killing firearm on Karna. The form of that firearm spread across the earth, sky, direction and the path of the sun and ignited there. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)