श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.89.16 
यानर्जुन: सभ्रुकुटीकटाक्षं
कर्णाय राजन्नसृजज्जितारि:।
तान् सायकैर्ग्रसते सूतपुत्र:
क्षिप्तान् क्षिप्तान् पाण्डवस्याशु संघान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! सूतपुत्र कर्ण पाण्डुपुत्र अर्जुन के चलाये हुए समस्त बाणों को शीघ्र ही नष्ट कर देता था और शत्रुविजयी कर्ण की ओर भौंहें चढ़ाकर व्यंग्यपूर्वक देखता था।
 
Nareshwar! Karna, the son of Suta, would quickly destroy all the arrows fired by Arjun, the son of Pandu, while looking sarcastically at Karna, the conqueror of the enemy, with his eyebrows raised.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas