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mahabharat 8.89.15: महाराज! अर्जुन के बाण कर्ण के रथ में घुसकर चारों ओर बिखर जाएँगे। जैसे शाम के समय पक्षियों का झुंड किसी वृक्ष पर सिर झुकाकर बसेरा करने के लिए जल्दी से बैठ जाता है।   |   mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.89.15 
ते सर्वत: समकीर्यन्त राजन्
पार्थेषव: कर्णरथं विशन्त:।
अवाङ्मुखा: पक्षिगणा दिनान्ते
विशन्ति केतार्थमिवाशु वृक्षम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! अर्जुन के बाण कर्ण के रथ में घुसकर चारों ओर बिखर जाएँगे। जैसे शाम के समय पक्षियों का झुंड किसी वृक्ष पर सिर झुकाकर बसेरा करने के लिए जल्दी से बैठ जाता है।
 
King! Arjun's arrows would enter Karna's chariot and scatter everywhere. Just like a flock of birds in the evening quickly settle on a tree with their heads down to take a roost.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)